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ट्रस्ट के बारेमे

भगवान शिवजीका आद्य ज्योर्तिलिंग श्री त्र्यंबकराजकी त्रिकाल पूजा करनेके लिये उन्हे हररोज भोग चढानेके लिये और ठीक उसी तरह पूरे सालकी कालावधीमें होनेवाले सभी त्योहार तथा होनेवाले समारोह एवं उत्सवोंका कामकाज देखनेका काम श्री. त्र्यंबकेश्वर संस्थान करता है। श्रीमंत नानासाहेब पेशवेने इस कामकाज संभालनेके लिये नारो दामोधर जोगलेकर इन्हे संस्थानकी तरुसे नियुक्त किया था, और इन त्योहार तथा उत्सवोंके लिये होनेवाले आर्थिक खर्चोंका इन्तंजाम भी कर दिया था. चलकर ब्रिटीशोंकी आमदनीसे तथा उनके राजमे भी यही परंपरा चलती रही। लेकिन विद्यमान स्थिती मे भारत सरकारकी औरसे संस्थानको किमान आर्थिक अनुदान मिलता है।

पूरे सालभरके त्योहारोंके इन्तजामके लिये ३ आदमी भगवान शिवजीकी त्रिकाल पुजा करनेवाले पुजक। २ इन्सान ब्रम्हगिरीकी प्रदशिणा करनेके लिये। भगवानके सामने पुराण आख्यान करनेवाले १ आदमी, किर्तन और हररोज आरती करनेके लिये १ हरीदास, १ आदमी दुसरे देवीदेवताओंकी पूजा करनेके लिये। गंगा नदीके लिये एकादशनी करनेवाला, ६ आदमी शागिर्दके रुपमें, २ आदमी रसोई बनानेके लिये, लिखापढी करने के लिये २ लेखनीक १, आदमी कोठवळा, सरदारके रुपमें और उसकी मदद करनेवाला ११ लडके १ सबनीस और १३ चपरासी, भगवानकी पालकी उठानेके लिये ४ लागे, १ आदमी आफताबी करनेके लिये, १ इन्सांन मशाल उठानेके लिये, १ आदमी भगवान शिवजीकी पूजाके लिये बेल पत्ते लानेके लिये, १ चोपदार, १ आदमी शंख बजानेके लिये जिसे जंगम कहते है, ३ घडयाळजी, १ गोलंदाज इन्सान, शहनाई बजाने के लिये ४ इन्सान, २ सुरकरी, २ कर्णेकरी, २ नगारा बजानेके लिये और १ इन्सान बडा नगारा बजाने के लिये, १ इंन्सान झाज बजानेवाला, कुछ भी काम करनेके लिये १ इंन्सान, बगीचेकी देखभाल करनेके लिये २ माली, १ कामाठीण और श्री त्र्यंबकेश्वर देवालयसे लेकर कुशावर्त तीर्थतक रास्तेकी सफाई करनेवाला १ इंन्सान, इस तरह से हर किसी काम के लिये लोगोंकी नियुक्ती की गयी थी। इन्ही सब काम करनेवाले लोगोसे उनपर सौपी हुई जिम्मेदारी ठीक तरहसे निभाते है या नही इस बात को जाँचनेके लिये विशेष पूरा करोबार देखनेवाले लोगोंकी नियुक्ती की थी।

भगवान शिवजीके आद्य ज्योर्तिलिंगको पहनाये जानेवाले गहने वगैरे चीजोंका इन्तंजाम भी करके रखा था। भगवानके लिये दो पालकी एक रत्नोंसे सजाया हुआ मुकूट एवं ताज पहलेपहल म्हैसुरके राजाके पास था, वहाँसे मुसलमानोंने उसे उठाकर दिल्लीमें रखा और आगे चलकर भगवानके उस रत्नोंके ताजको भाऊसाहेब पेशवेजीने लाकर भगवान को समर्पित किया। विंचूर संस्थानके मालिक श्रीमंत रघुनाथजी विठ्ठल दाणीजीने एक रथ कार्तिक शुध्द ७ शके १७८७ के दिन भगवानको समर्पित किया. कलमी माथेपरका शिरपेच तुरे मोतियोंसे बने गहने, मोतियोंका गलेमें पहनाये जानेवाला कंठा तथा पेंडल आदी तरहतरह के किमंती एवं महंगे गहने, १ छत्र, २ चामर, २ चवरर्‍या, ४ मोरपीस, २ अगदागिरी तलम भरजरी रेशमकी वस्त्र ठीक उसी तरह पूजाके लिये और भगवानको भोग चढानेके लिये चाँदीके बर्तन आदी किंमती चीजोंका समावेश है।


श्रीमंत श्री बाळाजी बाजीराव ऊर्फ नानासाहेब पेशवेजी के कालसे लेकर जोगलेकर घरानेकी वंशजोने श्री त्र्यंबकेश्वर संस्थानके कारोबार देखनेवाले की हैसीयतसे निम्नलिखित कालावधीमे काम किया.


नं. नांव सन
१. श्री. नारो दामोदर जोगलेकर १७५२
२. श्री. माधव हरी जोगलेकर १७५२
३. श्री. विसाजी त्र्यंबक जोगलेकर १८०१
४. श्री. दामोदर गोविंद जोगलेकर १८२३
५. श्री. काशिनाथ त्र्यंबक जोगलेकर १८२३
६. श्री. नारायण काशिनाथ जोगलेकर १८३४ ते १८९८
७. श्री. माधवराव नारायण जोगलेकर १८९८ ते १९५९
८. श्री. हनुमंत माधवराव जोगलेकर १९५९ ते १९७६

सन १९५४ में इस संस्थानका जिर्क सार्वजनिक विश्वस्त नोंदणी अधिनियमों के अंतर्गत की गयी थी। श्री. हनुमंत माधवराव उर्फ बबनसाहब जोगळेकरजी के बाद जोगळेकर घरानेके लोगोंने वशंपरंपरासे चलते आये हुए विश्वस्त पदका इस्तीफा दे दिया और फिर श्री प्रभाकर रामचंद्र गोखलेजीकी विश्वस्तपदपर नियुक्ती की गयी। उन्होंने १९९५ सालतक संस्थानके सोल ट्रस्टीकी हैसीयतसे संस्थानका कामकाज संभाला।

१९५४ सालमे संस्थानके विश्वस्त मंडलकी शुरुआत हुई। माननीय जिल्हा न्यायमूर्तिद्वारा नियुक्त किये हुए न्यायमूर्ति विश्वस्त मंडलके चेअरमनकी हैसीयतसे संस्थान का कारोबार संभालते है। ठीक उसी तरह त्र्यंबक नगरपरिषदके मुख्याधिकारी संस्थानके विश्वस्त मंडलके सचिवकी हैसीयतसे कारोबार संभालते है। इनके साथ त्र्यंबक गावके नागरीक श्री. रामरतन पुनमचंद सारडा, श्री. दामोदर पुंडलिक अडसरे, व श्री. मुरलीधर पुजांजी पवार इन तीनोंने इस संस्थानके विश्वस्त की हैसीयतसे कारोबार संभाला।

दि. १२ अक्टुबर २०११ को सर्वोच्च न्यायालयने दिये हुए फैसलेके अनुसार नौ सदस्योंके विश्वस्त मंडलकी स्थापना की गई। इस विश्वस्त मंडलके चेअरमन मा. जिला न्यायमूर्तिने नियुक्त किये न्यायमूर्तिही काम संभालते है। ठीक वैसे सचिवके हैसियतसे त्र्यंबकेश्वर नगरपरिषदके मुख्याधिकारी, तुंगार ट्रस्टके प्रतिनिधी, पुरोहित संघके प्रतिनिधी, पुजा करनेवाले लोगोंके प्रतिनिधी और धर्मदाय आयुक्त इन्होने नियुक्त किये हूए श्रध्दालु भक्तोके ४ प्रतिनिधी यह सब मिलकर संस्थानका कारोबार देखते है।


विश्वस्त मंडलके प्रेसिंडेटकी कारकीर्द निम्नलिखित कार्यकालकी है

नं. नांव सन
१. न्याय. श्री. ए. बी. पाटील दि. १ एप्रिल १९९५ से १४ जनवरी १९९६
२. न्याय. श्री. व्ही. व्ही. पळनीटकर दि. १४ जनवरी १९९६ से २० जुलाई १९९७
३. न्याय. श्री. अनिल. द. कुलकर्णी दि. २० जुलाई १९९७ से ५ जुन २००१
४. प्रभारी. श्री. एन. डी. बुराडे दि. ५ जुन २००१ से ८ सष्टेंबर २००१
५. न्याय. श्री. ए. पी. कुर्‍हेकर दि. ८ सष्टेंबर २००१ से २ जुन २००३
६. प्रभारी. श्री. एन. डी. बुराडे दि. २ जुन २००३ से २६ जुन २००३
७. न्याय. श्री. एस. एल. पैठण दि. २६ जुन २००३ से ८ सप्ष्टेंबर २००३
८. न्याय. श्री. एस. एल. पाठक दि. ८ सप्ष्टेंबर २००३ से २४ मई २००७
९. न्याय. श्री. आशुतोष नी. करमरकर दि. २४ मई २००७ से २ जुन २००८
१०. न्याय. श्री. के. डी. बोचे दि. २ जुन २००८ से २० जुन २०११
११. न्याय. श्री. अनिल. एन. खडसे दि. २० जुन २०११ से ९ जुन २०१४
१२. न्याय. श्रीमती. नेहा यू. कापडी दि. ३ जुन २०१४ से १२ सप्ष्टेंबर २०१४
१३. न्याय. श्री. व्ही.ए. दौलताबादकर दि. १२ सप्ष्टेंबर २०१४ से २० सप्ष्टेंबर २०१५
१४. न्याय. श्रीमती. यु. एस. जोशी-फाळके दि. २४ सप्ष्टेंबर २०१५ से २९ मार्च २०१७
१५. न्याय. श्री पी. के. चिटणीस दि. ३0 मार्च २०१७ से अबतक

सन्माननीय सर्वौच्च न्यायालयके आदेश के अनुसार आज के दिनोंमे संस्थानके विश्वस्त मंडलके पदाधिकारोंकी सूची

नं. विश्वस्त सन
१. अध्यक्ष्‍ा न्याय. श्री पी. के. चिटणीस जिल्हा न्यायाधिश, नाशिक.
२. सचिव डॉ. चेतना मानुरे-केरुरे मुख्याधिकारी, त्र्यंबक नगर पालिका
३. विश्वस्त श्री. यादवराव ल. तुंगार तुंगार ट्रस्ट प्रतिनिधी
४. विश्वस्त डॉ. श्री. सत्यप्रिय ज्ञा. शुक्ल पूजक प्रतिनिधी
५. विश्वस्त श्री. जयंत बा. शिखरे पुरोहित संघ प्रतिनिधी
६. विश्वस्त इजिं. श्री. कैलास व. घुले
७. विश्वस्त अँड. श्री. श्रीकांत प्र. गायधनी
८. विश्वस्त सौ. ललिता सं. शिंदे
९. विश्वस्त श्री. सचिन्द्र पाचोरकर
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